Sunday, June 16, 2019

एक हृदय पाने की कोशिश !

एक हृदय पाने की कोशिश !

इस कोशिश में शब्द छिन गए
चेहरे की मुस्कान छिन गई
अंतर के सब बोल छिन गए
यादों के सामान छिन गए !
पर हँसने गाने की कोशिश !
एक हृदय पाने की कोशिश !

इस दरिया की गहराई में
डूबे उतरे, पार नहीं था
रात गुज़रती तनहाई में
सपनों का उपहार नहीं था !
ज़िंदा रह पाने की कोशिश !
एक हृदय पाने की कोशिश !

एक हृदय जो कहीं और था
किसी और की थाती था वह
जीवनभर के संग साथ की
किसी प्रिया की पाती था वह !
कैसी दीवाने की कोशिश !
वही हृदय पाने की कोशिश !

किसी बात पर नहीं रीझना 
किसी बात पर नहीं खीझना
मुझको तुमसे नहीं जीतना 
पहली बारिश नहीं भीगना !
दूर चले जाने की कोशिश !
एक हृदय पाने की कोशिश !

धड़कन के इस करुण रुदन पर
घायल मन के मौन कथन पर
अट्टहास करते रहना तुम
इस भोले से अपनेपन पर !!!
इंद्रधनुष छूने की कोशिश !
एक हृदय पाने की कोशिश !!!



10 comments:

  1. आहा..वेदना का करुण गान...शब्द शब्द भाव भरे हैं...मर्मस्पर्शी सृजन दी👌

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  2. बहुत सुन्दर भाव मीना जी.
    आपकी कविता में शब्द, पहाड़ी नदी का प्रवाह लिए होते हैं.

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  3. एक हृदय जो कहीं और था
    किसी और की थाती था वह
    जीवनभर के संग साथ की
    किसी प्रिया की पाती था वह !
    कैसी दीवाने की कोशिश !
    वही हृदय पाने की कोशिश !...
    आपकी इस रचना ने वाकई मंत्रमुग्ध व विस्मित कर दिया है आदरणीया मीना जी। बहुत-बहुत शुभकामनाएँ ।

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  4. सादर नमस्कार !
    आपकी लिखी रचना "साप्ताहिक मुखरित मौन में" शनिवार 22 जून 2019 को साझा की गई है......... "साप्ताहिक मुखरित मौन" पर आप भी आइएगा....धन्यवाद!

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    1. बहुत बहुत आभार मीना जी।

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  5. बेहतरीन रचना

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  6. बहुत ही सुंदर रचना ,लाजबाब मीना जी ,एक एक शब्द हृदय में पीर जगाता हुआ

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  7. दिल को छूती बहुत ही सुंदर रचना मीना दी।

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  8. आप सभी का हृदय से शुक्रिया।

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  9. बहुत सुंदर प्रस्तुति

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